Thursday, December 26, 2013
Saturday, December 14, 2013
Friday, December 13, 2013
अन्ना और केजरीवाल, व्यक्ति व्यक्तित्व या सोच
साथियों
आज मन थोड़ा व्यथित है तो आप से थोड़ी बातें साझा करने से शायद दिल हल्का हो सके .
हम सभी "आप" के क्रन्तिकारी जी जान लगा कर पिछले कई महीनों से विभिन्न प्रकार के मुसीबतों का सामना कर रहे थे, हमने IAC के बाद बहुत से साथियों को टूटते देखा, कुछ स्वार्थों को पनपते देखा, पार्टी बनी तो सब ने खिल्ली उड़ाई, पार्टी के बाहर लड़ाई से पहले अंदर गन्दी राजनीती के खिलाफ खड़े हुए, जमीनी स्तर पे काम शुरू किया तो मीडिया ने साथ छोड़ा, उस बीच हम डंडे खाते रहे, जेल गए, प्रताड़ित हुए फिर भी 'आप' क्रन्तिकारीयों ने इतने महीनों की अथक अनवरत मेहनत कर जनता का दिल जीता तब मीडिया ने कुछ ध्यान देना शुरू किया.
इस बीच अन्ना कभी कभार ही कोई रैली कर पाए जिसमे हम सब उनके साथ प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से खड़े हुए. कभी कभार ही अन्ना के मुह से "आप" या "केजरीवाल" के लिए कुछ ऐसा निकला ही जिस से हम सब को आश्चर्य एवं दुःख भी हुआ.
इस बीच जैसे ही चुनाव के दिन पास आने लगे भ्रष्ट आसुरी शक्तियों ने अपना रंग दिखाना शुरू किया,तमाम सर्वे से मीडिया ने 4-6 सीट मिलने का भ्रमजाल फैलाया,विदेशों से पैसा, तो कभी अन्ना को धोखा,स्याही फेंकी,sting किया,और तमाम विपरीत परिस्थियों के बीच "आप" ने अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ी, दिल्ली का ये चुनाव कोई छोटा मोटा संघर्ष नहीं था, "आप" को सम्पूर्ण रूप से खत्म करने का भरपूर प्रयास हुआ.
जनता का दिल जीत कर वापस यहाँ तक पहुंचे भी तो भी सारा दोष "आप" का, सरकार क्यों नहीं बनाते, वादे पूरे कैसे करोगे. खैर , असुरों से लड़ने में तो हम सभी जी जान लगाने में माहिर हैं, लेकिन जब वो लोग जो कभी अपने थे ,वो कुछ ऐसा करते कहते हैं तो थोड़ा दुःख होता है .दिल्ली विधानसभा चुनाव के पुरे एक महीने किरण बेदी जी रजत शर्मा के INDIA TV में जो भी कहती रही उसका एक ही सार रहा की बीजेपी, "आप" से ज्यादा अच्छा विकल्प है, और जब हम किसी तरह से इस मुकाम पर पहुंचे तो ऐसे में वो हमें कोई सलाह देती हैं तो गुस्सा आना स्वाभाविक है, अरे वो तो शुक्र है आप क्रांतिकारियों के जज्बे और जनता के विश्वास से हम बच गए, वरना ये हमें नोच खाए होते.चुनाव के एन मौके पर हमारे आदर्श अन्ना जी ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी, जो भी कहा, किया वो एक तरह से "आप" के खिलाफ ही रहा.
मैं ये भी मानता हुं की अन्ना के कारण ही हम सभी के मन में एक आस जगी और हम इकट्ठे हुए.अरविन्द और प्रशांत भूषण ने हमें जनलोकपाल समझाया,हमने आंदोलन के जरिये भरपूर कोशिश की, लेकिन कुछ होता दिख नहीं रहा था ,तब आपको याद होगा की आंदोलन के आखिर आखिर में देश के जाने माने 23 शख्सियतों ने अन्ना से अनशन समाप्त कर "राजनितिक विकल्प" देने की मांग की थी और उस दिन अन्ना ने खुद मंच से इस बात का ऐलान किया था.नई पार्टी बनाने को लेकर मीडिया के माध्यम से पूरे देश से पूछा गया और बहुमत एक पार्टी बनाने के पक्ष में था तो फिर पार्टी बनाने में केजरीवाल की गलती कहाँ से हो गयी??
आज जो जनरल वी के सिंह रालेगांव में अन्ना के जनलोकपाल के मंच से केजरीवाल पे कटाक्ष करते दिखे वो स्वयं उन 23 गणमान्य लोगों में से एक थे. राजनैतिक विकल्प से उनका मतलब बीजेपी या मोदी को लाना था ऐसा आज समझ में आया है.
अन्ना ने अपने को अलग कर लिया, वहाँ तक सब ठीक था, लेकिन आप देख लो पिछले १ वर्ष में उन्होंने क्या क्या किया , उन्होंने साल भर तक "आम आदमी पार्टी" या केजरीवाल जी से कोई सवाल नहीं पूछा, पत्र लिख कर सवाल पूछा ठीक चुनाव के १० दिन पहले . और अब जोकपाल भी मंजूर है.
आप और मैं "अन्ना हजारे" नाम के व्यक्ति के साथ नहीं बल्कि उस सोच के साथ जुड़े थे, और आज भी उस सोच के साथ हैं पर व्यक्ति समय के साथ बदलते भी हैं, सभी मनुष्य हैं . मैंने व्यक्तिगत रूप से ये कभी नहीं माना के अन्ना किसी के बहकावे में कुछ बोल रहे, जब तक व्यक्ति स्वयं ना चाहे कोई भी उसका उपयोग नहीं कर सकता.पिछले २-३ सालों में अरविन्द जी ने हमें इतने अच्छे से अपने हक के लिए खड़े होना सिखा दिया है की सिर्फ अन्ना ही नहीं, कल को अरविन्द केजरीवाल भी अगर पूरी "आम आदमी पार्टी" को अपना पेटेंट समझ कर जोकपाल टाइप चीजें स्वीकारने लगे तो अधिकतर "आप" क्रन्तिकारी सबसे पहले विरोध करने वाले होंगे.आप और मैं हैं अन्ना, अगर हम वैसी गांधीवादी सोच रखते हैं, आप और मैं हैं केजरीवाल अगर हम देश में पूर्ण स्वराज लाने की सोच रखते हैं . कोई भी व्यक्ति चाहे कितना भी महान हो, उसका व्यक्तित्व ही चहुँओर प्रकाश फैलता है, और किसी का व्यक्तित्व कितना भी ओजस्वी हो वो ढल जाता है लेकिन वो जिस सोच के कारण महान बन पता है वो अटल रहती है और व्यक्ति के गुजर जाने के बाद भी वो सोच ही लोगों का पथप्रदर्शन करती है, करती रहती है और आगे भी करती रहेगी .
आप का संदीप तिवारी ,
आप क्रन्तिकारी,
रायपुर (छ.ग.) मो.9584521233
आज मन थोड़ा व्यथित है तो आप से थोड़ी बातें साझा करने से शायद दिल हल्का हो सके .
हम सभी "आप" के क्रन्तिकारी जी जान लगा कर पिछले कई महीनों से विभिन्न प्रकार के मुसीबतों का सामना कर रहे थे, हमने IAC के बाद बहुत से साथियों को टूटते देखा, कुछ स्वार्थों को पनपते देखा, पार्टी बनी तो सब ने खिल्ली उड़ाई, पार्टी के बाहर लड़ाई से पहले अंदर गन्दी राजनीती के खिलाफ खड़े हुए, जमीनी स्तर पे काम शुरू किया तो मीडिया ने साथ छोड़ा, उस बीच हम डंडे खाते रहे, जेल गए, प्रताड़ित हुए फिर भी 'आप' क्रन्तिकारीयों ने इतने महीनों की अथक अनवरत मेहनत कर जनता का दिल जीता तब मीडिया ने कुछ ध्यान देना शुरू किया.
इस बीच अन्ना कभी कभार ही कोई रैली कर पाए जिसमे हम सब उनके साथ प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से खड़े हुए. कभी कभार ही अन्ना के मुह से "आप" या "केजरीवाल" के लिए कुछ ऐसा निकला ही जिस से हम सब को आश्चर्य एवं दुःख भी हुआ.
इस बीच जैसे ही चुनाव के दिन पास आने लगे भ्रष्ट आसुरी शक्तियों ने अपना रंग दिखाना शुरू किया,तमाम सर्वे से मीडिया ने 4-6 सीट मिलने का भ्रमजाल फैलाया,विदेशों से पैसा, तो कभी अन्ना को धोखा,स्याही फेंकी,sting किया,और तमाम विपरीत परिस्थियों के बीच "आप" ने अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ी, दिल्ली का ये चुनाव कोई छोटा मोटा संघर्ष नहीं था, "आप" को सम्पूर्ण रूप से खत्म करने का भरपूर प्रयास हुआ.
जनता का दिल जीत कर वापस यहाँ तक पहुंचे भी तो भी सारा दोष "आप" का, सरकार क्यों नहीं बनाते, वादे पूरे कैसे करोगे. खैर , असुरों से लड़ने में तो हम सभी जी जान लगाने में माहिर हैं, लेकिन जब वो लोग जो कभी अपने थे ,वो कुछ ऐसा करते कहते हैं तो थोड़ा दुःख होता है .दिल्ली विधानसभा चुनाव के पुरे एक महीने किरण बेदी जी रजत शर्मा के INDIA TV में जो भी कहती रही उसका एक ही सार रहा की बीजेपी, "आप" से ज्यादा अच्छा विकल्प है, और जब हम किसी तरह से इस मुकाम पर पहुंचे तो ऐसे में वो हमें कोई सलाह देती हैं तो गुस्सा आना स्वाभाविक है, अरे वो तो शुक्र है आप क्रांतिकारियों के जज्बे और जनता के विश्वास से हम बच गए, वरना ये हमें नोच खाए होते.चुनाव के एन मौके पर हमारे आदर्श अन्ना जी ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी, जो भी कहा, किया वो एक तरह से "आप" के खिलाफ ही रहा.
मैं ये भी मानता हुं की अन्ना के कारण ही हम सभी के मन में एक आस जगी और हम इकट्ठे हुए.अरविन्द और प्रशांत भूषण ने हमें जनलोकपाल समझाया,हमने आंदोलन के जरिये भरपूर कोशिश की, लेकिन कुछ होता दिख नहीं रहा था ,तब आपको याद होगा की आंदोलन के आखिर आखिर में देश के जाने माने 23 शख्सियतों ने अन्ना से अनशन समाप्त कर "राजनितिक विकल्प" देने की मांग की थी और उस दिन अन्ना ने खुद मंच से इस बात का ऐलान किया था.नई पार्टी बनाने को लेकर मीडिया के माध्यम से पूरे देश से पूछा गया और बहुमत एक पार्टी बनाने के पक्ष में था तो फिर पार्टी बनाने में केजरीवाल की गलती कहाँ से हो गयी??
आज जो जनरल वी के सिंह रालेगांव में अन्ना के जनलोकपाल के मंच से केजरीवाल पे कटाक्ष करते दिखे वो स्वयं उन 23 गणमान्य लोगों में से एक थे. राजनैतिक विकल्प से उनका मतलब बीजेपी या मोदी को लाना था ऐसा आज समझ में आया है.
अन्ना ने अपने को अलग कर लिया, वहाँ तक सब ठीक था, लेकिन आप देख लो पिछले १ वर्ष में उन्होंने क्या क्या किया , उन्होंने साल भर तक "आम आदमी पार्टी" या केजरीवाल जी से कोई सवाल नहीं पूछा, पत्र लिख कर सवाल पूछा ठीक चुनाव के १० दिन पहले . और अब जोकपाल भी मंजूर है.
आप और मैं "अन्ना हजारे" नाम के व्यक्ति के साथ नहीं बल्कि उस सोच के साथ जुड़े थे, और आज भी उस सोच के साथ हैं पर व्यक्ति समय के साथ बदलते भी हैं, सभी मनुष्य हैं . मैंने व्यक्तिगत रूप से ये कभी नहीं माना के अन्ना किसी के बहकावे में कुछ बोल रहे, जब तक व्यक्ति स्वयं ना चाहे कोई भी उसका उपयोग नहीं कर सकता.पिछले २-३ सालों में अरविन्द जी ने हमें इतने अच्छे से अपने हक के लिए खड़े होना सिखा दिया है की सिर्फ अन्ना ही नहीं, कल को अरविन्द केजरीवाल भी अगर पूरी "आम आदमी पार्टी" को अपना पेटेंट समझ कर जोकपाल टाइप चीजें स्वीकारने लगे तो अधिकतर "आप" क्रन्तिकारी सबसे पहले विरोध करने वाले होंगे.आप और मैं हैं अन्ना, अगर हम वैसी गांधीवादी सोच रखते हैं, आप और मैं हैं केजरीवाल अगर हम देश में पूर्ण स्वराज लाने की सोच रखते हैं . कोई भी व्यक्ति चाहे कितना भी महान हो, उसका व्यक्तित्व ही चहुँओर प्रकाश फैलता है, और किसी का व्यक्तित्व कितना भी ओजस्वी हो वो ढल जाता है लेकिन वो जिस सोच के कारण महान बन पता है वो अटल रहती है और व्यक्ति के गुजर जाने के बाद भी वो सोच ही लोगों का पथप्रदर्शन करती है, करती रहती है और आगे भी करती रहेगी .
आप का संदीप तिवारी ,
आप क्रन्तिकारी,
रायपुर (छ.ग.) मो.9584521233
Sunday, December 8, 2013
Miles to go.....
We have come a long way from where we started a year and few days ago at Jantar Mantar. From a party which the mainstream parties ridiculed, called 'char aadmi party' we have come to a condition where we will actually have a say in the legislature.
In a press conference earlier today, Arvind Kejriwal said we are ready to play the role of a constructive opposition in Delhi and soon we will be moving pan-India.
All this has been achieved due to sacrifice of thousands of people. This video is a tribute to all those volunteers.
Jai Hind!
Jai Hind!
Post by Aam Aadmi Party.
Friday, December 6, 2013
Wednesday, December 4, 2013
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